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मन में आते अनवरत विचारों के प्रवाह जब शब्दों का रूप लेते है तो कलम चलती है (वर्तमान में कंप्यूटर के की-बोर्ड पर उँगलियाँ) बस इसी विचार प्रवाह का नाम है "अपनी बात"

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समाजवादी सर्वहित बीमा केयर कार्ड

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समाजवादी सर्वहित बीमा केयर कार्ड
आज के समाचार पत्र में इस योजना के बारे में बहुत बड़ा विज्ञापन प्रकाशित किया गया था. सोचा चलो  जान लें आखिर कैसे चल रही है यह योजना और कैसे हो रहा है सर्वहित।
पेपर में दिए स्टेट को ऑर्डिनेटर के नंबर पर फ़ोन किया और उनसे पूछा “इस योजना के बारे में कुछ जानकारी दीजिये”. जनाब ने बिना ज्यादा कुछ पूछे सीधे जानकारी दे दी। .”आपने बीमा केयर कार्ड का काम लेने के लिए फ़ोन किया होगा न? देखिये इसमें जितने कार्ड का काम लेना है 7 रूपये प्रति कार्ड के  हिसाब से आपको जमा करना होगा, काम समाप्त होने के बाद आपको ३ रूपये मिलाकर आपके रुपए वापस कर दिए जायेंगे। बाकी किसानों से आप खसरा-खतौनी, फोटो कॉपी आदि के ५०-६० रूपये ले सकते हैं”.
मैंने क्यों फ़ोन किया यह जाने बिना जितनी जानकारी उन्होंने दे दी उसके बाद और कुछ जानकारी लेने की जरुरत ही नहीं थी, यानि किसान को ५०-६० रूपये खर्च करने ही है तो वह समाजवादी अहसान क्यों लेगा? क्यों लाइन में लगेगा। इतने में तो कई कंपनियां एक्ससिडेंटल इंश्योरेंश करती ही है. जय समाजवाद।

आज के समाचार पत्र में इस योजना के बारे में बहुत बड़ा विज्ञापन प्रकाशित किया गया था. सोचा चलो  जान लें आखिर कैसे चल रही है यह योजना और कैसे हो रहा है सर्वहित।

पेपर में दिए स्टेट को ऑर्डिनेटर के नंबर पर फ़ोन किया और उनसे पूछा “इस योजना के बारे में कुछ जानकारी दीजिये”. जनाब ने बिना ज्यादा कुछ पूछे सीधे जानकारी दे दी। .”आपने बीमा केयर कार्ड का काम लेने के लिए फ़ोन किया होगा न? देखिये इसमें जितने कार्ड का काम लेना है 7 रूपये प्रति कार्ड के  हिसाब से आपको जमा करना होगा, काम समाप्त होने के बाद आपको ३ रूपये मिलाकर आपके रुपए वापस कर दिए जायेंगे। बाकी किसानों से आप खसरा-खतौनी, फोटो कॉपी आदि के ५०-६० रूपये ले सकते हैं”.

मैंने क्यों फ़ोन किया यह जाने बिना जितनी जानकारी उन्होंने दे दी उसके बाद और कुछ जानकारी लेने की जरुरत ही नहीं थी, यानि किसान को ५०-६० रूपये खर्च करने ही है तो वह समाजवादी अहसान क्यों लेगा? क्यों लाइन में लगेगा। इतने में तो कई कंपनियां एक्ससिडेंटल इंश्योरेंश करती ही है. जय समाजवाद।



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