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मन में आते अनवरत विचारों के प्रवाह जब शब्दों का रूप लेते है तो कलम चलती है (वर्तमान में कंप्यूटर के की-बोर्ड पर उँगलियाँ) बस इसी विचार प्रवाह का नाम है "अपनी बात"

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कल रात माँ के कमरे में आई एस आई वाले आये....

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कहीं आपके घर में भी तो नहीं आ गई आईएसआई!!!
कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी के बयानो को देखकर आजकल ऐसा लगता है जैसे या तो उनका भाषण लिखने वाला भी कांग्रेस के भ्रष्टाचार से परेशान है और इसका बदला वह राहुल गांधी के लिये ऐसे ऊट-पटांग और बेसिरपैर के भाषण लिखकर ले रहा है या किसी कारणवश राहुल की मानसिक स्थिति डावांडोल हो गई है परिणामस्वरूप वह कब कहां क्या कह जायें उन्हें खुद नहीं मालूम होता।
कभी दादी, नानी और पापा की कहानियां सुनाते हैं। कभी उनके अच्छे!! कार्यों के बारे में बताते हैं। शायद राहुल गांधी के घर में कहानियों की किताबों पर प्रतिबन्ध रहा होगा परिणामस्वरूप उन्हें और कोई कहानी पढ़ने को ही नहीं मिली सिर्फ अपने परिवार की कहानियां ही मालूम हैं। उन्हें शायद यह नहीं मालूम कि इस देश में दादी, मम्मी, पापा के अलावा अदद सवा करब लोग और भी रहते हैं और उनमें से बहुत ऐसे हैं जिनकी कहानी में दादी, मम्मी और पापा की कहानी से कहीं ज्यादा दम है।
खैर कहानी का क्या, दर्शक जब मूवी देखता है और उसमें एक अभिनेता सैकड़ों लोगों को अकेले मारता या कुछ और अजब-गजब करता है तो दर्शक जमकर ताली बजाते हैं और उसका आनन्द लेते हैं यह अच्छी तरह जानते हुये भी कि यह सब सिर्फ कल्पना है और इसका असलियत से कोई वास्ता नहीं।
कहानी तो चलती हैं। लोग मनोरंजन के लिये सही उसको देखते हैं। लेकिन कहानी सुनाते-सुनाते राहुल बाबा यह ही भूल गये कि कहानी का असल पात्रों से मेलजोल होना कभी-कभी गले की हड्डी बन जाता है।
आज राहुल ने अपने भाषण में मुजफ्फरनगर दंगो का जिक्र किया लेकिन शायद यह भूल गये कि यह दादी की सुनाई कहानी नहीं असलियत है और जो कुछ कहा वह इस सवा करब से भी अधिक के देश को शर्मशार करने और हर देशप्रेमी का खून खौलाने के लिये काफी है।
राहुल उवाच ‘‘एक इंटेलीजेंस का आदमी उनके कमरे में आया और उसने कहा, राहुल जी आपको क्या बताऊं मुजफ्फरनगर दंगो में 10-12 जो मुसलमान लड़के मारे गये हैं उनके परिवार वालों के संपर्क में आईएसआई है। वह उनसे बात करके उन्हें बरगला रही है। हम लोग अपनी ओर से पूरी कोशिष कर रहे हैं लड़कों को समझाने की कि इनकी बातों में मत आओ।‘‘
राहुल इस बात को खुले मंच से देश-विदेश के मीडिया के सामने कह रहे हैं। उन्हे शर्म नहीं आती यह कहते हुये कि हमारे देश के अंदरूनी मामलों में कोई विदेशी खुफिया एजेंसी दखल दे रही है? भारत में सरकार नाम की कोई चीज बची है क्या? कभी किन्नरों के किसी शिविर में उनकी बिना मर्जी जाकर देखिये शायद लेने के देने पड़ जायेगे। क्या इस देश की सरकार किन्नरों से भी गयी बीती है?
राहुल ने इस कहानी को देशी-विदेशी मीडिया के सामने कहा, क्या जैसे ही उन्हें इस बात का पता चला उन्होंने देश के प्रधानमंत्री को सूचना दी? क्या उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को इस बारे में सूचना दी? क्या उन्होंने किसी सक्षम ऐजेंसी को इस बारे में सूचना दी? अगर राहुल की कहानी सही है तो क्या किसी देश के अंदरूनी मामलों में हद दर्जे की दखलंदाजी सामने आने के बाद भी राहुल गांधी ने उस पर क्या कार्रवाई करवाई? इतनी गोपनीय और संवदेनशील जानकारी इंटेलीजेंस आॅफिसर ने राहुल गांधी को क्यों दी? उनकी सरकार में वैधानिक हैसियत क्या है?
या फिर देश की विश्व में इस तरह छीछा-लेदर करवाकर राहुल गांधी को लगता है कि उन्हें वोट मिल जायेंगे? क्या कल राहुल गांधी यह भी कहेंगे कि एक आदमी मेरे कमरे में आया और उसने बताया कि मेरी मां को आईएसआई बरगलाने की कोशिष कर रही है और हम उन्हें समझा रहे हैं कि इसकी बातांे में मत आओ???

कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी के बयानो को देखकर आजकल ऐसा लगता है जैसे या तो उनका भाषण लिखने वाला भी कांग्रेस के भ्रष्टाचार से परेशान है और इसका बदला वह राहुल गांधी के लिये ऐसे ऊट-पटांग और बेसिरपैर के भाषण लिखकर ले रहा है या किसी कारणवश राहुल की मानसिक स्थिति डावांडोल हो गई है परिणामस्वरूप वह कब कहां क्या कह जायें उन्हें खुद नहीं मालूम होता।

कभी दादी, नानी और पापा की कहानियां सुनाते हैं। कभी उनके अच्छे!! कार्यों के बारे में बताते हैं। शायद राहुल गांधी के घर में कहानियों की किताबों पर प्रतिबन्ध रहा होगा परिणामस्वरूप उन्हें और कोई कहानी पढ़ने को ही नहीं मिली सिर्फ अपने परिवार की कहानियां ही मालूम हैं। उन्हें शायद यह नहीं मालूम कि इस देश में दादी, मम्मी, पापा के अलावा अदद सवा करब लोग और भी रहते हैं और उनमें से बहुत ऐसे हैं जिनकी कहानी में दादी, मम्मी और पापा की कहानी से कहीं ज्यादा दम है।

खैर कहानी का क्या, दर्शक जब मूवी देखता है और उसमें एक अभिनेता सैकड़ों लोगों को अकेले मारता या कुछ और अजब-गजब करता है तो दर्शक जमकर ताली बजाते हैं और उसका आनन्द लेते हैं यह अच्छी तरह जानते हुये भी कि यह सब सिर्फ कल्पना है और इसका असलियत से कोई वास्ता नहीं।

कहानी तो चलती हैं। लोग मनोरंजन के लिये सही उसको देखते हैं। लेकिन कहानी सुनाते-सुनाते राहुल बाबा यह ही भूल गये कि कहानी का असल पात्रों से मेलजोल होना कभी-कभी गले की हड्डी बन जाता है।

आज राहुल ने अपने भाषण में मुजफ्फरनगर दंगो का जिक्र किया लेकिन शायद यह भूल गये कि यह दादी की सुनाई कहानी नहीं असलियत है और जो कुछ कहा वह इस सवा करब से भी अधिक के देश को शर्मशार करने और हर देशप्रेमी का खून खौलाने के लिये काफी है।

राहुल उवाच ‘‘एक इंटेलीजेंस का आदमी उनके कमरे में आया और उसने कहा, राहुल जी आपको क्या बताऊं मुजफ्फरनगर दंगो में 10-12 जो मुसलमान लड़के मारे गये हैं उनके परिवार वालों के संपर्क में आईएसआई है। वह उनसे बात करके उन्हें बरगला रही है। हम लोग अपनी ओर से पूरी कोशिष कर रहे हैं लड़कों को समझाने की कि इनकी बातों में मत आओ।‘‘

राहुल इस बात को खुले मंच से देश-विदेश के मीडिया के सामने कह रहे हैं। उन्हे शर्म नहीं आती यह कहते हुये कि हमारे देश के अंदरूनी मामलों में कोई विदेशी खुफिया एजेंसी दखल दे रही है? भारत में सरकार नाम की कोई चीज बची है क्या? कभी किन्नरों के किसी शिविर में उनकी बिना मर्जी जाकर देखिये शायद लेने के देने पड़ जायेगे। क्या इस देश की सरकार किन्नरों से भी गयी बीती है?

राहुल ने इस कहानी को देशी-विदेशी मीडिया के सामने कहा, क्या जैसे ही उन्हें इस बात का पता चला उन्होंने देश के प्रधानमंत्री को सूचना दी? क्या उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को इस बारे में सूचना दी? क्या उन्होंने किसी सक्षम ऐजेंसी को इस बारे में सूचना दी? अगर राहुल की कहानी सही है तो क्या किसी देश के अंदरूनी मामलों में हद दर्जे की दखलंदाजी सामने आने के बाद भी राहुल गांधी ने उस पर क्या कार्रवाई करवाई? इतनी गोपनीय और संवदेनशील जानकारी इंटेलीजेंस आॅफिसर ने राहुल गांधी को क्यों दी? उनकी सरकार में वैधानिक हैसियत क्या है?

या फिर देश की विश्व में इस तरह छीछा-लेदर करवाकर राहुल गांधी को लगता है कि उन्हें वोट मिल जायेंगे? क्या कल राहुल गांधी यह भी कहेंगे कि एक आदमी मेरे कमरे में आया और उसने बताया कि मेरी मां को आईएसआई बरगलाने की कोशिष कर रही है और हम उन्हें समझा रहे हैं कि इसकी बातांे में मत आओ???



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