apneebat

मन में आते अनवरत विचारों के प्रवाह जब शब्दों का रूप लेते है तो कलम चलती है (वर्तमान में कंप्यूटर के की-बोर्ड पर उँगलियाँ) बस इसी विचार प्रवाह का नाम है "अपनी बात"

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Ashish Mishra


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कवि महोदय

Posted On: 16 Nov, 2012  
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Others लोकल टिकेट में

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पांच राज्यों में चुनाव दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में विधानसभा चुनाव 11 नवंबर से 8 दिसंबर तक होंगे। इन प्रदेशों की जनता किसी भी तरह के प्रलोभन में न आकर केवल ईमानदार उम्मीदवारों को ही चूने। देश हित में जनता कुछ ऐसा करके दिखाएँ की 2014 के लोकसभा चुनाव में भ्रष्टों के लिए कोई स्थान ना बचे और भ्रष्ट मुंह छुपाते फिरें।।काउंटडाउन शुरु ---- अब बचकर कंहा जाओगे भ्रष्टो। भ्रष्ट भगाओ स्वामी रामदेव का आशीर्वाद पाओ! जागो-जागो ऐसे एक पन्थ दो काज कर दिखाओ!! पांच राज्यों में चुनाव में जो चुप पाए जायेंगे! इतिहासों के पन्नो में वे सब कायर कहलायेगे!! कृपया टिप्पणी करें और सबको भेजें!! ॐ !! आपकी एक वाह नया लिखने की देती है चाह!! आर एम मित्तल मोहाली

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ममा, मुझे ये ‘‘बहन जी’’ टाइप ड्रेस नहीं पहननी, प्लीज समझा करो न। फ्रैंड्स क्या कहेंगे’’। बेटी को मिनी स्कर्ट पहनने से मना करते-करते पर एक मां बेटी के जिद आगे हार ही गई। एक सोशल क्लब की बैठक में ‘‘दामिनी’’ (मीडिया द्वारा पीडि़त लड़की को दिया गया नाम) के साथ हुयी जघन्य घटना पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी हो रही है। ‘‘हम सुबह 6 बजे से टाउनहाल से रैली निकालेंगे’’, अरे नहीं 10 बजे निकलातें हैं इतनी सुबह मीडिया कवरेज नहीं मिलेगा’’। ‘‘शर्मा जी! मीडिया वालों को सूचना जरूर दे देना, मीडिया को पता न चला तो सारी मेहनत बर्बाद हो जायेगी।’ एक हकीकत को बयान करती पोस्ट है आपकी ! लेकिन ये संख्या बहुत कम होती है जो केवल टेलीविज़न पर आना चाहते हैं अधिकांश लोग सच मानिए बिना किसी स्वार्थ के , अपने दिल की बात सुनकर जाते हैं और फिर यही तो लोकतंत्र है ! भीड़ ही तो चाहिए सरकार पर दबाव बनाने के लिए ! जब भीड़ ही चाहिए तो क्या फर्क पड़ता है ये कैसी भीड़ है और कहाँ से आई है !

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प्रिय योगी जी, ब्लॉग को विजिट कर अपना अमूल्य समय देने के लिए धन्यवाद. आपको उत्तर देने से पहले मैं बता दूँ की मैं स्वयं एक कवि हूँ, और मुझे नहीं पता कि कविता लिखने का यह हुनर या बीमारी मुझे कैसे लगी. ? पर यह पता है मैं जब कक्षा ८ का विद्यार्थी था तब से ही कवितायेँ लिख रहा हूँ. उस समय कवि सम्मलेन में भी खूब सहभागिता की परिणाम स्वरूप जब तब माँ-पापा और शिक्षकों का कोप भाजन भी बनना पड़ा. दूरदर्शन, आकशवाणी आदि पर भी जाने का अवसर मिला साथ ही फ़िल्मी दुनिया के लिए भी कुछ रचनाएँ स्वीकृत हुई. अब एक बात बताइए की हम लोग यानि "कवि" -: प्रधानमंत्री के ऊपर हास्य लिखते हैं. मुख्यमंत्री के ऊपर हास्य लिखते हैं. सरकारी शिक्षको के ऊपर हास्य लिखते हैं. पति-पत्नी पर हास्य लिखते हैं. कुल मिलकर लगभग हर पद और रिश्तो पर हास्य लिखते हैं. क्या प्रधानमंत्री बनना हंसी या दुर्भाग्य का पात्र बन जाना है? क्या मुख्यमंत्री बनना हंसी या दुर्भाग्य का पात्र बन जाना है? क्या पति या पत्नी बनना हंसी या दुर्भाग्य का पात्र बन जाना है? अगर हम यह सोचें की कवि पर हास्य लिख लिख कर कवि मुझसे नाराज हो जायेंगे तो ऐसा नहीं है. क्योंकि यह हास्य जागरण ब्लॉग पर अभी डाला है इससे पहले यह कई ऐसी पत्रिकओं में छपा है जिनके संपादक कवि हैं. उन्होंने न सिर्फ इस हास्य को पसंद किया बल्कि पुरष्कृत भी किया. निश्चिंत रहें, एक सच्चा कवि संकुचित ह्रदय हो ही नहीं सकता. मस्त रहो- व्यस्त रहो. आपका अपना आशीष मिश्र

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